अकेलेपन ने उसे डरा दिया। उसे लगा, "मैं कैसे जीवित रहूँगा? यहाँ से निकलूँगा कैसे?"
सात दिन और सात रात - वह छिपता, जंगली जानवरों से लड़ता, भूख-प्यास सहता, लेकिन हार नहीं मानता। lone survivor in hindi
अस्पताल में आँख खुली तो सबने उसे "लोन सर्वाइवर" कहकर बुलाया। वह अकेला था जो उस नरसंहार से बच निकला था। जंगली जानवरों से लड़ता
एक-एक करके विक्रादित्य ने अपने साथियों को गिरते देखा। पहले रमन, फिर प्रीत, फिर करन... हर बार एक धमाका, एक गोली, एक चीख। रात के अंधेरे में वह अपने मृत साथियों के बीच घंटों छिपा रहा। पसलियों में चोट थी
विक्रादित्य गिर गया। लेकिन इससे पहले कि दुश्मन उसे खत्म करता, हेलीकॉप्टरों की आवाज़ आई - उसकी सेना आ गई थी। उन्होंने विक्रादित्य को बेहोशी की हालत में बचाया।
दुश्मन ने उसे भी मृत समझ लिया था। लेकिन विक्रादित्य जीवित था - बुरी तरह घायल, उसका बायाँ हाथ टूटा हुआ था, पसलियों में चोट थी, लेकिन उसकी सांसें अभी बाकी थीं।
जब उससे पूछा गया, "आप अकेले कैसे बचे?"